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गुरुवार, सितंबर 02, 2010

दोहा -विकास

शोर विकास का हो रहा ढूँडो कहाँ विकास ,
खेत जमीनें छिन रहीं ,मजे ले रहे   खास |

पोखर     नेता  ले   उड़े , टीले       ठेकेदार,
लूटमार के दौर में , हो रहि    मारम्मार |

दोहा

जेलों में जो बंद हैं , भले लोग कहलाएँ ,
भगवा आतंकी हुआ , ये आतंक फैलाय  |

सोमवार, अगस्त 09, 2010

खेल खेल में कर गए ,देखो कैसा खेल ,
भ्रस्टाचार के आ रहे  ,नित्य नए ईमेल

रविवार, जुलाई 11, 2010

दोहा - सास-बहू

 सास बहू  से  कह रही  ,क्यों  पहिने  ये पेंट , 
साडी   का  फैशन  गया , लगे  पेन्ट  डीसेंट  |

सासू  माँ की  बात को ,बहु ने किया  रिजेक्ट ,
थैली  का  आंटा  सदा   , होता है    परफेक्ट |

सासूजी   हतप्रभ   हुई   ,सुन   बहुजी   की   राय ,
घंटी  पूजा  की   बजे     , नींद   टूट    है      जाय  |

सास   बनाती  बेड  -टी  , खोल  बहू     तू     गेट ,
नों    सुबह   के  बज    गए , आफिस   होगी  लेट  |

सास -बहू    तकरार   का  ,   समाधान  है    एक ,
माँ  बेटी   बनकर  रहें  ,  रक्खें  सदा    विवेक    |

सोमवार, अप्रैल 19, 2010

दोहे ---बड़े लोग

मनुआ   या  संसार  में  , भांति -भांति  के   लोग ,
वो   ही  नर  सबसे  बड़ा , जिसको  ज्यादा  रोग  |

बिना  नमक  भोजन  करें, बिन   चीनी  की  चाय ,
खुद  गोली  खाते  फिरें  , तुम्हें  मॉल    खिलायं  |

रुखी  सूखी   खा   रहे   , वे    हें    छोटे    लोग   , 
मदिरा   अंडा   मांस  हें  ,  बड़े  व्यक्ति   के  भोग |

इक -दो   कम्बल  दान  कर , जो फोटो   खिंचवाय ,
छपवा  के  अखवार  में  ,     भामा शाह   कहलाय |

दुकाने   व    मार्कीट     ,       मारपीट      हथियाय ,   
ये   सेवक   इक   रात  में  , अरवपति  बन    जाय |