शोर विकास का हो रहा ढूँडो कहाँ विकास ,
खेत जमीनें छिन रहीं ,मजे ले रहे खास |
पोखर नेता ले उड़े , टीले ठेकेदार,
लूटमार के दौर में , हो रहि मारम्मार |
मैं, डा. राकेश शरद, घोषणा करता हूँ कि मैं व्यंग्य क़ी शरण में हूँ. व्यंग्य ही मेरे लिए बुद्धत्व है.समझो क़ी मैं बोध को प्राप्त हूँ. आओ तुम भी बोलो...व्यंग्यम शरणम गच्छामि !
दोहा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
दोहा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गुरुवार, सितंबर 02, 2010
दोहा
जेलों में जो बंद हैं , भले लोग कहलाएँ ,
भगवा आतंकी हुआ , ये आतंक फैलाय |
भगवा आतंकी हुआ , ये आतंक फैलाय |
सोमवार, अगस्त 09, 2010
खेल खेल में कर गए ,देखो कैसा खेल ,
भ्रस्टाचार के आ रहे ,नित्य नए ईमेल
भ्रस्टाचार के आ रहे ,नित्य नए ईमेल
रविवार, जुलाई 11, 2010
दोहा - सास-बहू
सास बहू से कह रही ,क्यों पहिने ये पेंट ,
साडी का फैशन गया , लगे पेन्ट डीसेंट |
सासू माँ की बात को ,बहु ने किया रिजेक्ट ,
थैली का आंटा सदा , होता है परफेक्ट |
सासूजी हतप्रभ हुई ,सुन बहुजी की राय ,
घंटी पूजा की बजे , नींद टूट है जाय |
सास बनाती बेड -टी , खोल बहू तू गेट ,
नों सुबह के बज गए , आफिस होगी लेट |
सास -बहू तकरार का , समाधान है एक ,
माँ बेटी बनकर रहें , रक्खें सदा विवेक |
साडी का फैशन गया , लगे पेन्ट डीसेंट |
सासू माँ की बात को ,बहु ने किया रिजेक्ट ,
थैली का आंटा सदा , होता है परफेक्ट |
सासूजी हतप्रभ हुई ,सुन बहुजी की राय ,
घंटी पूजा की बजे , नींद टूट है जाय |
सास बनाती बेड -टी , खोल बहू तू गेट ,
नों सुबह के बज गए , आफिस होगी लेट |
सास -बहू तकरार का , समाधान है एक ,
माँ बेटी बनकर रहें , रक्खें सदा विवेक |
सोमवार, अप्रैल 19, 2010
दोहे ---बड़े लोग
मनुआ या संसार में , भांति -भांति के लोग ,
वो ही नर सबसे बड़ा , जिसको ज्यादा रोग |
बिना नमक भोजन करें, बिन चीनी की चाय ,
खुद गोली खाते फिरें , तुम्हें मॉल खिलायं |
रुखी सूखी खा रहे , वे हें छोटे लोग ,
मदिरा अंडा मांस हें , बड़े व्यक्ति के भोग |
इक -दो कम्बल दान कर , जो फोटो खिंचवाय ,
छपवा के अखवार में , भामा शाह कहलाय |
दुकाने व मार्कीट , मारपीट हथियाय ,
ये सेवक इक रात में , अरवपति बन जाय |
सदस्यता लें
संदेश (Atom)